Friday, April 30, 2010

Kya sambhav hai?

चाहत
इक मधुर एहसास
पाने की नही
मुक्ति की प्यास

स्वयं को सुनाई देता
मौन स्पंदन
सीमाओं में बँधा
मुक्त बंधन

क्या संभव है शब्दों में
प्रेम समेट पाना

क्या संभव है प्रेम को
भाषा में व्यक्त कर पाना

क्या संभव है अभिव्यक्ति को
सही शब्द दे पाना

क्या संभव है
चाहत के विस्त्रत आकाश को
शब्दों में बाँध पाना?

3 comments:

  1. kya sambhav hai santa ke bina reh pana??

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  2. ranjan ne saari dastan bayan kar di !! :P

    par likhai par daad deni padegi... chaape raho

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  3. agreeing with shaky :P

    waise AWESOME poem hai ranjn :)

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